पिता

                      पिता

 

1-ori

 

मां के बारे में बहुत कुछ कहा और लिखा गया है लेकिन पिता के बारे में जो कहा जाता है वो शायद बहुत कम है ।

तुम जो हो तो हमारा वजूद है ,
तुम न हो तो हम बेवजूद है ।
तुम से ही बाजार की सारी रौनकें दिखती है ,
तुम जो हो तो ये सारी रौनकें अपनी है ।

तुम जो हो तो एक उम्मीद और एक आस है ,
तुम से ही तो हमारी हिम्मत और विश्वास है ।
तुम ही तो हो जिसने जिंदगी का पहला अक्षर सिखाया ,
तुम ही वो हो जिसने अंधेरे मे उजाला दिखाया ।

मेरे ख्वाब को पूरी करने की जिम्मेदारी हो तुम ,
मेरे आंसुओं मे छिपी लाचारी हो तुम ।
मेरे खुशी के लिए बेच दे अपने आप को जो ,
वो भगवान स्वरूप व्यापारी हो तुम ।

मेरा अभिमान और स्वाभिमान हो तुम ,
जाना जाउंगा जिस से वो पहचान हो तुम ।
यू तो सभी बयां कर देते है दिल की बातें ,
पर कठोर से चेहरे के पिछे सब सहने वाले देवता हो तुम |

By: Rishabh Mishra

 

 

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11 Comments Add yours

  1. Tarannum says:

    So true.

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  2. Madhusudan says:

    Bahut hi khubsurati se sachchhayee bayaan kiya hai…..👌👌👌

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    1. thanks ….follow kriye hmari kivitayen pdhte rehne ke liye !!

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  3. Deepti says:

    Loved this one..just awesome

    Liked by 1 person

    1. Thanks …do follow us for such poetries !! 😊

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  4. bhaatdal says:

    Nice I have written one on the same .. do read if you get time ..

    Liked by 1 person

    1. Thanks …Do share that link with us !! 😊

      Liked by 1 person

  5. One of the Best that I have read about fathers… great tribute…😊

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